हिंदी कहानी – सजा

हिंदी कहानी – सजा

बीनू को आज कम पर आने में देरी हो रही थी। लेकिन आज संडे होने के कारण मैं थोड़ी निश्चिंत थी। मै आराम से बालकनी में बैठकर चाय पी रही थी। तभी बाहर बीनू को उसके पति की गाड़ी पर आते देखा। सोसाइटी के गेट के बाहर पति ने उसे गाड़ी से उतारा और वह बिना अपने पति की ओर देखे चुपचाप अंदर चली आई।

मेरे घर के बाहर खड़ी होकर उसने दरवाजे की घंटी बजाई। मैंने दरवाजा खोला और वह अंदर आई। आमतौर पर मुझे देखते ही एक मुस्कुराने वाली बीनू आज बिल्कुल चुप थी, जैसे अपने ही विचारों में खोई हुई हो।

“क्या हुआ है बीनू? तुम आज थोड़ी उदास लग रही हो,” मैंने पूछा।

“कुछ नहीं दीदी, बस ऐसे ही।” वो एक फीकी सी मुस्कान के साथ बोली।

उसके बाद उसने कुछ नहीं कहा, इसलिए मैंने भी उससे कुछ नहीं पूछा। वह काम में लग गई। मैं वहीं सोफे पर बैठी मोबाइल देख रही थी। थोड़ी देर बाद मुझे याद आया कि दूध का बर्तन शायद ढाका नहीं था। इसलिए मैं जल्दबाजी में किचन में गई। बीनू सिंक में बर्तन धो रही थी। शायद मेरे आने का उसे पता नहीं चला, इसलिए उसने जो साड़ी का पल्लू पहले पूरी तरह लपेटा था, वह कमर में बांध लिया था। इसलिए उसकी पीठ दिखने लगी थी। जब मैंने उसकी पीठ देखी तो वहां चोट के निशान थे। हाथ पर भी चोट के निशान दिख रहे थे।

“क्या हुआ है बीनू? ये चोट कैसी है ? और हाथ पर भी चोट लगी है?” मैंने पूछा।

मेरे सवाल से बीनू ने चौंककर फिर से साड़ी का कमर में बंधा हुआ पल्लू निकालकर पीठ पर पूरा लपेट लिया। शायद वो ये सब मुझसे छुपाना चाह रहीं थी।

“वो दीदी…कल मै…वो मै चलते-चलते पैर फिसलके गिर गई, इसीलिए थोड़ीसी चोट लगी है,” वो हिचकिचाते हुए बोली।

“ये गिरने की चोट नहीं है बीनू, ये मारपीट के निशान मालूम पड़ रहे है। और इतना तो मुझे समझ आता ही है। अब तुम सच सच बताओ, क्या तुम्हारे पति ने तुम्हें मारा है?” मैंने पूछा।

“हाँ दीदी, कल उनको किसी बात का गुस्सा आया था इसीलिए ” वो मुझसे नजरें बचाते हुए बोली।

“तुम क्यों सहती हो इतना? अगर पति तुम्हे हमेशा मारता पीटता रहता है, कम पे नहीं जाता, पूरा घर तुम्हारे भरोसे चलता है तो उसे छोड़ क्यों नहीं देती। वैसे भी अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है। तुम चाहो तो उसे छोड़कर अभी भी एक नई जिंदगी शुरू कर सकती हो।” मैंने गुस्से में कहा।

मेरी बात सुनकर वो चुप हो गई। मैं भी गुस्से में बहुत कुछ बोल चुकी थी। वैसे भी मैं उसके पति को ज्यादा नहीं जानती थी, लेकिन कभी कभार उसकी चोटे दिख जाती तो मुझे उसपर बहोत गुस्सा आता। और मै उसे तब भी सुनती के ऐसे पति को छोड़ देना चाहिए । पर वो फिर भी कुछ न कहती। बस चुप हो जाती।

बीनू पिछले दो साल से हमारे यहां काम के लिए आ रही थी। दिखने में सुंदर, गोरा रंग, लंबे बाल, तेज तर्रार नाक और पतली सी काया। लगभग चौबीस पच्चीस साल की होगी। उसके बात करने का लहजा देखकर लगता के अच्छे घर की लड़की है। वो शुद्ध हिंदी में बात करती और कई सारे अंग्रेजी शब्द भी सफाई से बोल लेती।

मै जब भी उसके पति विकास को देखती मुझे समझ नहीं आता के बीनू ने इससे शादी क्यों की होगी। उसे तो कोई भी अच्छा लड़का मिल जाता। मेरी तरह शायद और भी लोगों के मन में ये सवाल आता ही होगा। क्योंकि विकास उसके सामने कुछ भी न था। दिखने में तो साधारण था पर उसका व्यवहार बीनू के साथ बिल्कुल भी ठीक न था। एकदम गुंडा लगता।

बीनू की सुंदरता के कारण उसपर हमेशा शक करता रहता। पर उसे काम पर भेजने के अलावा उसके पास कोई चारा भी हीं था क्योंकि घर बीनू की कमाई से ही चलता। विकास किसी भी काम पर अपने व्यवहार के कारण ज्यादा दिन टिक नहीं पाता। पर फिर भी बीनू पर कई सारी बंदिशे लगाकर उसे आए दिन छोटी छोटी बातों पर मारता पीटता रहता। गलती से बीनू किसी पुरुष से बात करती दिखती तो न आव देखता न ताव। सीधे मारना शुरू कर देता। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता के सड़क पर और लोग उन्हें देख रहे है।

बीनू ने बातों बातो में बताया था कि उनकी शादी को छह साल हो गए हैं। शादी के बाद दो-तीन महीने तक विकास ने उसके साथ अच्छा व्यवहार किया था। उसके बाद जो पीड़ा उसे सहनी पड़ी, वह आज तक सहे ही जा रही है। विकास कोई काम नहीं करता था। बीनू आठ-दस घरों के कपड़े धोती और बर्तन साफ करती, और इसी से घर चल रहा था। वहीं उन्हीं पैसों में से विकास को शराब के लिए पैसे भी चाहिए होते।

उसे जब जब किसी भी बात पे गुस्सा आता तो वो सारा गुस्सा बीनू पर ही उतारता। पहले तो सिर्फ कभी कभार मारता था। पर बाद में उसे मानो आदत सी पड़ गई मारने की। उसपर सास भी विकास को नहीं रोकती। उल्टा उसके कम भरती रहती। एक तो पहले से बीनू उन्हें कुछ खास पसंद नहीं थी। ऊपर से शादी के इतने साल बाद ही बीनू ने कोई खुशखबरी नहीं दी थी। इसीलिए सास और पति दोनों उसे सुनाते रहते।

पड़ोस वाली सोसायटी में मेरी एक दोस्त रहती थी। मै जब इस सोसाइटी में शिफ्ट हुई तो उसने मुझे घर के काम के लिए बीनू का नाम सुझाया। बीनू काम बहुत अच्छा करती। बस आए दिन उसके पति के हंगामा करने और मारपीट करने से परेशान रहती। वो कोशिश करती के मुझसे ये सब छुपाए। पर उसके गोरे बदन पे मार के निशान छुप न पाते। और ये सब देखकर मैं चिढ़ जाती और उसे कहती के ये सब सहो मत। उसे छोड़ दो और अपने मायके चली जाओ। कम से कम अपने पति के अत्याचार से तो बचोगी। पर वो हमेशा की तरह चुप ही रहती।

आज भी वो चुप ही थी। पर आज मेरा गुस्सा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। मै बोली ही जा रही थी। मैने उससे कहा कि,

“अगर तुम ऐसे चुपचाप सहती रहोगी तो एक दिन तुम्हें अपनी जान से हाथ धोना ना पड़ जाए। क्यों सहती हो? अगर चाहो तो मैं तुम्हारे लिए किसी वर्किंग वूमेन हॉस्टल में रहने का इंतजाम कर सकती हूँ, दूसरा काम ढूंढने में भी मदद करूँगी। पर तुम्हारे शरीर पर ये चोटें मुझसे देखी नहीं जाती।”

मेरी ये बाते सुनकर आज वो चुप नहीं रही। उसने कहा,

“दीदी जो तकलीफें मुझे मिल रही हैं, उसका कारण मैं खुद हूँ। मेरे पापों की सजा के रूप में मुझे ये सब सहना पड़ रहा है। मैने जिंदगी में बहोत गलतियां की है, इसलिए मेरे साथ ये सब हो रहा है।”

“तुम ये क्या कह रही हो बीनू? मैं तुम्हें इतने दिनो से जानती हूँ। मुझे यकीन नहीं कि तुम कुछ गलत कर सकती हो।,” मैने उससे कहा।

“लेकिन यही सच है दीदी। मैने मेरे अपना के साथ बहुत बुरा किया है। अपने परिवार के साथ, अपने माता-पिता के साथ।” बात करते-करते उसकी आंखों में आंसू आ गए।

“क्या हुआ? कुछ बताओगी? आखिर किया क्या है तुमने ?” मैंने पूछा।

“मै एक बहुत अच्छे परिवार से थी। प्यार करने वाले माता-पिता थे। मुझसे प्यार करने वाला भाई था। मैं पढ़ाई में होनहार थी। मेरे पिता सबसे मेरी होशियारी की तारीफ करते थकते नहीं थे। उनकी इच्छा थी कि मैं खूब पढ़ाई करूं। इसलिए उन्होंने दसवीं के बाद बड़ी उम्मीदों के साथ मुझे शहर में पढ़ने भेजा।

मैं भी मन लगाकर पढ़ रही थी, लेकिन फिर विकास मेरी जिंदगी में आया। वह कॉलेज के बाहर बदमाशी करता, लगातार मेरे आसपास मंडराता। और मै पागल जवानी के जोश में उसके बहकावे में आ गई। मुझे उससे प्यार हो गया और बाकी चीजों से मेरा ध्यान अपने आप हट गया।

मै उसके प्यार में पागल हो गई। उसके बिना मैं कुछ भी सोच नहीं पा रही थी। दसवीं में 90% लाने वाली मैं बारहवीं में सिर्फ 60% लेकर पास हुई। उस दिन घर पर सबने मुझे बहुत डांटा। और फिर मैंने बिना सोचे-समझे उसके साथ भाग जाने का फैसला लिया। और भागकर एक मंदिर में उसके साथ शादी करली।

उसके घर आकर पता चला कि वह जितना दिखाता था उतना कुछ भी नहीं था उसके पास। किसी पुरानी से बस्ती में उसका दो कमरों का एक छोटासा घर था। मैं अलग जाति की थी, इसलिए उसकी मां ने पहले दिन से ही मुझसे नफरत की थी। मैंने सोचा कि गरीब है तो क्या हुआ? कम से कम उसको मुझसे प्यार तो है। इसलिए मैंने उन हालातों को भी अपना लिया।

लेकिन दो-चार महीनों में उसने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। तब मुझे समझ आ गया कि मैं पूरी तरह फंस चुकी हूं। मैंने सोचा कि एक बार अपने मायके जाऊं, माफी मांगूं। लेकिन तभी पता चला कि मेरे पिता हार्ट अटैक से चले गए हैं। मुझे पता था कि कही ना कही उनके जाने का कारण मैं ही हूँ। उनके जाने के बाद मेरे लिए मायके जाने के सारे रास्ते बंद हो गए। और मेरे पास इनके साथ रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

मुझे मेरे किए पर बहुत पछतावा है। मुझे पता है के मेरी हरकतों के कारण मेरे पिता इस दुनिया से चले गए। मेरी मां और भाई ने भी मेरे कारण बहुत कुछ सहा होगा। और मेरा प्रायश्चित इसी में है के अपने कर्मों की सजा काटू। मैं उसके अत्याचार को अपने कर्मों का फल मानकर सह रही हूं। ” उसने कहा।

” लेकिन तुम्हारी एक गलती की सजा तुम सारी जिंदगी भुगतो ये सही तो नहीं ना बीनू।” मैने पूछा।

” एक ही गलती थी पर वो बहुत बड़ी गलती थी दीदी। इतनी बड़ी गलती के मेरी वजह से कई जिंदगीया बदल गई। मेरे गलत कर्मों का परिणाम मेरे परिवार को भी भुगतना पड़ा। मैंने अपने माता-पिता को बहुत दुख दिया है, इसलिए आज मुझे ये दुख मिल रहा है। मुझे लगता है कि मैं इसीके लायक हूं। यही मेरे पापों की सजा है,” उसने दृढ़ता से कहा और अपना काम खत्म करके वहां से चली भी गई।

मैं सोचती ही रही के क्या सच में कुछ गलतियों के परिणाम इतने भयानक होते हैं? क्या बीनू की गलती इतनी बड़ी थी के उसे माफ नहीं किया जा सकता। क्या उसके मायके वाले कभी उसको माफ कर सकेंगे ? और क्या बीनू कभी इन सबसे ऊबर पाएगी ?

समाप्त।

©®आरती निलेश खरबड़कर.

धन्यवाद।

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