हिंदी कहानी – मीरा

हिंदी कहानी – मीरा

लेकिन न जाने क्यों मुझे वो मीरा के लिए ठीक नहीं लगा। जल्दबाजी में मैने उसे ये कह भी दिया के लड़का तुम्हारे लिए मुझे ठीक नहीं लगा। फिर अचानक से दिमाग में आया के ये मैने क्या बोल दिया है। फिर मैने बात को मजाक में पलट दिया। उसके परिवार ने रिश्ता पक्का कर दिया था। मीरा को भी लड़का ठीक ही लगा था तो मैने कुछ कहना उचित नहीं समझा।

जब लेनदेन की बात चल रही थी तो लड़केवालों ने काफी मांगे रखो थी। हैरत की बात ये थी के लड़के ने खुद कहा के उसे कुछ चीजे तो चाहिए ही चाहिए। मीरा के घरवालों ने भी उसकी अच्छी नौकरी और अच्छे लोग है ये सोचकर उसकी सारी मांगे पूरी की। जल्द ही मीरा की शादी हो गई। उसकी शादी के काफी महीनों बाद तक हमारी मुलाकात न हो पाई। फोन पर बाते होती पर काफी कम। हम दोनों ही अपनी नई नई गृहस्थी में उलझ गई थी।

शादी के लगभग ८ – ९ महीने बाद मुझे मायके जाने का मौका मिला और मेरी लंबे समय बाद मीरा से मुलाकात हुई। पहले तो मीरा ने मुझे देखते ही गले से लगा लिया। उसके चेहरे की चमक मानो कही खो सी गई थी। थोड़ी दी इधर उधर की बाते हुई। पर मीरा उदास सी लग रही थी। मैने जब उसे पूछा के क्या सब ठीक है तो अचानक से वो रोने लगी। कुछ देर के लिए तो मैं समझ ही नहीं पाई की हुआ क्या है। मैने उसे शांत किया और रोने का कारण पूछा तो उसने बताना शुरू किया।

मीरा का पति किसी दूसरे शहर में नौकरी करता था। शुरुवात में कुछ दिन मीरा अपने ससुराल रही। शादी के कुछ समय बाद उसका पति उसे अपने साथ ले जाएगा ये तय था। पर शादी के छह माह बाद भी उसने मीरा को अपने साथ ले जाने का जिक्र तक नहीं किया। यहां तक के मीरा से फोन पर बहुत कम बात करता। पर बहुत ज्यादा दिन होने के बाद भी जब मीरा को वो अपने साथ नहीं के गया तो मीरा के घरवालों को चिंता होने लगी। अब तो मीरा के ससुराल वालों को भी लोग पूछने लगे कि नई दुल्हन को अभीतक बेटे के साथ क्यों नहीं भेजा। आखिरकार परिवारवालों के दबाव में उसे मीरा को अपने साथ ले जाना ही पड़ा।

लेकिन वहां भी वो मीरा के साथ रुखा व्यवहार करता। ना तो उससे खुलकर बाते करता न ही कही घुमाने ले गया। कभी उसकी किसी इच्छा के बारे में नहीं पूछा। कभी उसे किसी खर्च के लिए पैसे नहीं दिए। अपने पति के व्यवहार से आहत होते हुए भी मीरा इसी इंतजार में दिन काटती के कुछ दिनों बाद सब ठीक हो जाएगा। कभी कभी उसे लगता के जो भी हुआ वो सब अपने मां को बताए। पर अचानक से उसके पिता की तबियत बिगड़ी तो वो कुछ बता ही न पाई। सबकुछ दिल में रखकर वो घरवालों के सामने मुस्कुराती रहती। उसे लगता के एक दिन सब ठीक हो जाएगा। पर उसकी आशा से विपरीत उसका पति दिन ब दिन उससे और रुखा व्यवहार करने लगा। आजकल वो मीरा पर बात बात पे गुस्सा निकालता। कोई न कोई बहाना बनाकर उससे झगड़ता रहता।

एक दिन मीरा का ध्यान उसके पति के फोन की तरफ गया जिसमें लगातार मैसेजेस के नोटिफिकेशन आ रहे थे। उसने सहजता से अपने पति का मोबाइल हाथ में लिया तो उसने जो देख उससे उसके पैरों तले से जमीन ही खिसक गई। उसे किसी लड़की के मैसेजेस आ रहे थे। और उन्हें पढ़कर मीरा जान गई थी के उसके पति का इस लड़की के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा है। इतने में ही उसका पति जो थोड़ी देर के लिए बाहर गया था वो घर आ गया और मीरा के हाथ में अपना फोन और उसकी बदहवास हालत देखकर उसे पता चल गया के उसने जरूर उसकी प्रेमिका के मैसेजेस पढ़े होंगे

उसे देखकर मीरा ने उससे इन सब बातो का जवाब मांगा। उसने पूछा के अगर उसे किसी और से प्रेम था तो फिर मुझसे शादी क्यों की ? पर उसके पति ने इस बात का जवाब देने के बजाय उससे फोन छीनकर कहा के तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे फोन को हाथ लगाने की। मीरा रोती गिड़गिड़ाती रही पर उसका पति अपना फोन लेकर हिना कोई जवाब दिए बाहर चला गया। और उस दिन के बाद उसने मीरा के साथ अपना व्यवहार कुछ ज्यादा ही खराब कर दिया। अब तो नौबत हाथ उठाने और मारपीट करने तक आ गई थी।

ये दुख क्या कम था के उसे एक दिन पता चला के उसके पिता को दिल का दौरा पड़ा है। ये जानकर वो भागी भागी सी अकेले ही अपने पिता के पास उनसे मिलने पहुंच गई। पर उसका पति उसके पिता को देखने तक नहीं आया।

कुछ दिनों बाद मीरा के पिता अस्पताल से छुट्टी लेकर घर आ गए। मीरा कुछ दिन मायके ही रहने वाली थी। मीरा का उदास चेहरा देखकर उसकी माँ के मन में शक पैदा हो रहा था। और मां ने उससे पूछा भी के तुम पति पत्नी के बीच सब ठीक चल रहा है ना पर फिर भी मीरा ने माँ को कुछ नहीं बताया। इतने दिनों में मीरा के पति ने एक भी बार उसे फोन नहीं किया और ये बात मां के ध्यान में भी आ रही थी।

धीरे धीरे मीरा की मां को यकीन हो गया के इन दोनों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। मां ने उसे अपनी कसम देकर पूछा तो मीरा और छिपा न पाई और उसने मां को सबकुछ बता दिया। मीरा की मां को ये जानकर बहुत दुख हुआ। एक तरफ अपने पति की बिगड़ी तबियत और दूसरी तरफ बेटी की ज़िंदगी में आया ये तूफान देखकर वो पूरी तरह से हताश हो गई।

फिर भी मीरा की मां ने अपने दामाद को समझाने की सोची। मां ने दामाद से फोन करके बड़ी ही सौम्यता से उसकी गलती बताई और जो भी हुआ उसे भूलकर मीरा के साथ अपनी गृहस्थी में अच्छे से रहने की सलाह दी। दामाद ने भी हा में हा मिलाई। कुछ दिन मायके रहने के बाद मीरा वापस अपने पति के पास लौट गई। पर यह से उसके दुख और ज्यादा बढ़ने वाले थे।

मीरा ने अपनी मां को सबकुछ बताया इस बात पे उसके पति को बहुत गुस्सा आया था। उसने अब आए दिन मीरा पे हाथ उठाना शुरू कर दिया। अब तो वो घर में जरूरत का सामान भी नहीं लाता। जो थोड़ी बहुत चीजे रहती उससे मीरा अपना गुजरा करती और वो आए दिन बाहर से खाना खाकर आता।

मीरा की मां को अब मीरा के हालात का अंदाजा हो गया था इसी कारण जब मीरा के पिता ठीक हुए तो उन्होंने सबसे पहले मीरा के साथ होते दिनों जो भी हुआ है उससे उन्हें अवगत कराया। वो हिना वक्त गवाए तुरंत मीरा से मिलने पहुंचे। मीरा को देखकर उन्हें ओटा चल गया था के मीरा कितने बुरे हालातों में दिन काट रही है। मीरा के पिता जब उसे मिलने उसके घर गए तो घर में ना दूध रखा था ना ही आटा। मीरा के पिता ये सब देख नहीं पाए। वो मीरा को सीधे अपने घर वापस ले आए।

मीरा अपने मायके वापस आ गई। शाम को उसका पति जब घर आया तो उसे पता चला के मीरा को उसके पिता अपने घर ले गए है। तो उसने बात संभालने की जगह सीधे उनसे फोन पे बहस की और उन्हें बताया के मीरा कैसे एक बुरी पत्नी है जो अच्छे से रह न पाई और सीधे मीरा से तलाक की मांग कर दी।

पिछले एक साल में मीरा के साथ बहुत कुछ बुरा हुआ था। मुझे ये सब सुनकर बहुत बुरा लगा। मीरा की माँ ने मुझसे कहा के मै उसे समझाऊं और उसे अपनी आने वाली जिंदगी की तरफ ध्यान देने के लिए कहूं। मैंने भी उसे समझाया के जो कुछ भी हुआ उसमें उसकी कोई गलती नहीं थी। उसके पति के किए की सजा वो अपने आप को न दे। मैने उसे जो हुआ उसे भूलकर फिर से अपनी पढ़ाई शुरू करने की सलाह दी। लेकिन उसके लिए यह सब इतना आसान नहीं था।

फिर भी उसने अपने माता-पिता की खुशी के लिए पढ़ाई फिर से शुरू की। उसके पिता ने उसे पास ही के शहर में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए भेजा। मीरा ने भी अपना दुख भूलकर अपने माता-पिता के विश्वास पर खरा उतरते हुए दूसरी ही परीक्षा में सफलता हासिल की।

उसे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में अच्छी पोस्ट पर जॉब मिल गई। अब वो नौकरी करने लगी थी। अब जाकर उसके जीवन में स्थिरता आई थी। अब मीरा अपने पैरों पर खड़ी हो गई थी।अब वह आत्मविश्वास से भरी थी। उसके तलाक की कैसे अभी भी कोर्ट में चल रही थी।

उसके जॉब की बात अब उसके पति को भी पता चल गई थी। मीरा का रहन सहन अब उसे मीरा की ओर आकर्षित करने लगा था। अब वो मीरा से तलाक नहीं चाहता था। जब कोर्ट में तलाक को लेकर आखिरी फैसला होने वाला था तब मीरा के पति ने उससे कहा के अब वो चाहे तो वो उससे तलाक का अपना फैसला वापस ले लेगा और अपना प्रेम प्रसंग भूलकर उसके साथ एक नई शुरुवात करेगा।

पर मीरा ने उसे सुनाया के उसने अपने अतीत को अब पीछे छोड़ दिया है और अपने जीवन में वो ऐसे व्यक्ति को नहीं चाहती जो उसकी नौकरी और रहन सहन देखकर उसके साथ रहना चाह रहा हो। मीरा के पति को ये सुनकर झटका सा लगा। पर अब वो कुछ नहीं कर सकता था। आखिर उसका और मीरा का तलाक हो गया।

मीरा ने उसके बाद जिंदगी में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने अपनी खुशियां खुद ही ढूंढ ली थी। उसके मातापिता को अपनी बेटी कर गर्व हो रहा था और उसका पति आज उसे खोने के लिए पछता रहा था।

समाप्त।

©® आरती निलेश खरबड़कर.

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *