अंजू एक हसमुख और चुलबुली लड़की थी। एक मध्यमवर्गीय परिवार में अपने माता पिता और भाई बहनों के साथ खुशी से रह रही थी। उसका एक बड़ा भाई था और दो छोटी बहने थी। छोटा लेकिन खुशहाल परिवार था। सब ठीक चल रहा था। लेकिन जल्द ही इस खुशहाल परिवार को किसी की नजर लगने वाली थी। कुछ ऐसा होने वाला था जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।
और इस बदलाव का कारण बनने वाली थी अंजू। अंजू अपने पड़ोस में रहने वाले एक अधेड़ वर्ष के आदमी के अरुण से प्यार कर बैठी। अरुण ने भी उसे बड़े बड़े सपने दिखाए। शादी के बाद उसे रानी की तरह रखेगा। उसके लिए चांद तारे भी ले आएगा और न जाने क्या क्या। उसकी ऐसी बातों के कारण अंजू और भी ज्यादा उसकी ओर खिंची चली जाती। अब तो उसे अरुण के अलावा कुछ और नजर ही नहीं आता।
दोनों की मुलाकातों का सिलसिला जारी था। लेकिन एक दिन उनके इस प्यार की भनक अंजू के पिता को लग गई। और उन्होंने अंजू को बहुत ज्यादा फटकार लगाई। उसे अरुण से दूर रहने के लिए कहा। उसकी अधेड़ उम्र के अलावा बहुत सारी ऐसी चीजे थी जो अंजू के पिता को बिल्कुल भी पसंद नहीं थी। अरुण दिनभर मजदूरी करने के बाद रात को उन्हीं पैसों से शराब पीता।
उसकी दो शादियां भी हो चुकी थी। पहली पत्नी ने उसकी हरकतों से तंग आकर आत्महत्या कर ली और दूसरी पत्नी कुछ महीने बाद ही मायके लौट गई थी। उसके बारे के इतना जानने के बाद कोई भी पिता अपनी बेटी को उससे दूर हो रखना चाहेगा।
लेकिन अंजू को अपने अंधे प्यार में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। उसे अब लग रहा था के उसकी ज़िन्दगी कोई फिल्म है और उसके पिता विलेन बनके उसे उसके प्यार से दूर करना चाह रहे है। इसी तरह के सपनों में खोई अंजू अब अपने परिवार को कोई भी बात सुनने को तैयार ही नहीं थी।
फिर उसके माता पिता ने उसके घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी। उन्हें लगा था के कुछ दिन उससे दूर रहेगी तो अपने आप संभल जाएगी। लेकिन इसके बाद अंजू और बागी हो गई। और एक दिन अपने माता पिता की से छुपते छुपाते वो अरुण के साथ भाग गई।
दोनों ने किसी मंदिर में जाकर शादी करली और घर लौट आए।
अंजू के माता पिता के लिए ये बात बहुत ही कष्टदायक थी। अंजू ऐसा भी कर सकती है इस बात पे उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था। समाज क्या कहेगा ये सवाल तो था ही पर इसके बाद अंजू की आनेवाली ज़िन्दगी कैसी होगी इसकी भी चिंता उन्हे खाए जा रही थी।
अंजू ने अरुण के घर में अपनी गृहस्थी बसाई। शादी के बाद भी अंजू के घरवालों ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की के अगर वो अभी भी अपने घर वापस आना चाहती है तो से सकती है। मगर अपनी ही धुन में मगन अंजू ने किसी की बात नहीं मानी। उसे समझाने के लिए उसके घर गए मां बाप को उसने ये कहते हुए अपमानित करके घर से बाहर निकाल दिया के वो अपने पति के बारे में कुछ भी ग़लत नहीं सुन सकती।
उसकी छोटी बहन भी जब उसके घर समझाने गई के दीदी मम्मी पापा आपकी भलाई के लिए बोल रहे है है। आप कम से कम उनकी बात सुन तो लो। पर उसने छोटी बहन को भी डांटकर भगा दिया। इसके बाद तो अंजू के मायके वालों ने हार मान ली। और सब कुछ अंजू के भाग्य पर छोड़ दिया।
शादी के शुरुवाती दिनों में तो सब अच्छा चल रहा था। अंजू की तरफ अरुण का व्यवहार भी बहुत अच्छा था। पर जैसे-जैसे दिन बीतते गए, अरुण का व्यवहार बदलने लगा। अरुण अब शराब पीकर घर आने लगा था। और शराब के नशे में अंजू के मायके वालों से अभद्र भाषा में बात करता। उनके घर के सामने खड़े होकर बोलता के तुम्हारी बेटी को तुम्हारे नाक के नीचे से ले गया और तुम कुछ नहीं कर सके। अरुण की बाते सुनकर अंजू का बड़ा भाई उसे रोकने के लिए आ जाता और दोनों में अक्सर कहासुनी हो जाती। इधर अंजू भी अपने पति का पक्ष लेते हुए आए दिन मायके वालो से लड़ाई करती रहती।
इन लोगो के झगड़े दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे। अरुण अब जानबूझकर अंजु के भाई के सामने ऐसे कुछ बोलता ताकि वो चिढ़कर झगड़ा करने आ जाए। अंजु के पिता को अब इन झगड़ों के कारण हमेशा चिंता सताए रहती के ये झगड़े कहीं किसी दिन ज्यादा बढ़कर कोई भयानक मोड़ ना ले। इसीलिए उन्होंने फैसला किया के वे लोग अब ये घर छोड़कर कहीं और रहने के लिए चले जाएंगे। और कुछ ही दिनों में वो लोग अपना घर छोड़कर कहीं और रहने चले गए। हमेशा के लिए।
अंजू को अबतक अपने मायके वालो की कोई फ़िक्र न थी। ना ही कोई कीमत थी। पर अब जब उसका परिवार उससे दूर हो गया था तो उसको अब उनकी याद सताने लगी थी। अब उसे अपने माता पिता और भाई के साथ बिताए अच्छे पल याद आने लगे थे। अब उसे अपने व्यवहार के लिए थोड़ा बुरा लग रहा था। पर अभी वो कुछ भी नहीं कर सकती थी। क्योंकि उस तो पता भी नहीं था के वो लोग कहा रहने गए है। और अगर अब अंजू उनसे मिलने चली भी जाए तो शायद वो लोग अंजू से बात करने या कोई रिश्ता रखने से मना भी कर देते। इसीलिए अंजू ने अपने दिल पर मा बाप का दिल दुखाने का बोझ लेकर अपनी गृहस्थी पर ध्यान देने की सोची। पर अब अरुण का व्यवहार पहले से ज्यादा बुरा होने लगा था। अरुण अब रोज रात को घर शराब पीकर आने लगा था।
अंजू ने पहले तो अरुण को बहुत समझाया के शराब पीना अच्छी बात नहीं है। फिर उसने अरुण को सख्ती से समझाया के वो शराब पीकर घर न आया करे। और उस दिन अरुण ने पहली बार अंजू पर हाथ उठाया। उसका ये रूप देखकर अंजू डर सी गई। उसे समझ में नहीं आ रहा था के उसके साथ ये क्या हो रहा है। और फिर मारपीट का सिलसिला ऐसे ही चलने लगा।
इसी बीच अंजू को पता चला के वो मां बनने वाली है। उसने सोचा के बच्चे के आने की खबर से अरुण अपने आप में कुछ सुधार लेकर आएगा। उसका व्यवहार बदल जाएगा। वो जिम्मेदार बनेगा। पर जैसा उसने सोचा वैसा कुछ ना हुआ। अरुण जो भी कमाता वो शराब में उड़ा देता। और ऐसे में अंजू को अब दो वक्त के खाने में भी दिक्कत होने लगी थी। मजबूरन उसे आसपास की महिलाओं के साथ गर्भावस्था मै मजदूरी करने जाना पड़ा।
इधर अरुण का आए दिन शराब पीकर अंजू से झगड़ा करना जारी था। अरुण अब अंजू को बोलता के उसी के कारण उसकी ज़िन्दगी खराब हुई है। उसे घर को संवारना नहीं आता। तो कभी कहता के तुम्हारे लक्षण ठीक नहीं है। जो लड़की अपने मां बाप को धोका दे सकती है वो मुझे भी दे ही सकती है। इसी बीच अंजू ने एक प्यारे बेटे को जन्म दिया। लेकिन बच्चा होने के बाद अब वो काम के लिए नहीं जा पाती तो घर में पैसों की दिक्कत हो रही थी। अंजू ने जैसे तैसे एक साल गुजारा किया। और उसके बाद वो अपने एक साल के बेटे को साथ लेकर मजदूरी करने के लिए जाने लगी।
अंजु अब अच्छे समझ गई थी कि क्यों उसके पिता ने उसकी और अरुण की शादी के खिलाफ थे। एक बच्चे की मां बनने के बाद उसे अपनी मां के मन की उलझन का पता चला। अरुण अच्छा इंसान नहीं है, ये उसके मा बाप ने उसे बहुत समझाया था पर वो अपने अंधे प्यार के कारण कुछ भी समझ न सकी।
अंजु के माता-पिता ने अरुण का अपनी दोनों पत्नियों के साथ व्यवहार को देखा था, इसलिए वे अंजु को समझाने की कोशिश कर रहे थे। अंजू को अब बहुत ज्यादा पछतावा हो रहा था। पर अब वो मा बाप के पास लौटती भी तो कैसे। क्योंकि उसीके कारण उन्हें अपना बरसो पुराना घर छोड़कर जाना पड़ा था। वो अब शायद अंजू को कभी माफ नहीं करेंगे ये बात उसे पता थी। अंजू बहुत दुखी थी पर अपने बेटे के लिए उसे जीना तो था ही। इसीलिए वो वही ज़िन्दगी जीती रही जो शायद उसने खुद ही अपने भाग्य में लिख दी थी।
अंजु ने अरुण के प्रेम के लिए अपने माता-पिता के प्रेम को ठुकरा दिया था। लेकिन क्या वो सच में प्रेम था?
प्यार दुनिया की सबसे खूबसूरत भावना है। प्यार कभी गलत नहीं होता। गलत तो इंसान होते है। और गलत इंसान से प्यार करने का नतीजा भी बुरा ही होता है। हम इंसान को पहचानने में गलती कर देते है और इल्जाम आता है प्यार पर। इसीलिए जब भी प्यार करे आंखे खोलकर इंसान को परखने के बाद करे।
समाप्त।

