मीना जल्दी जल्दी घर के काम निपटा रही थी। काम निपटाने के बाद उसके पहले अपने बेटे को अच्छे से तैयार किया। उसे नए कपड़े पहनाए। फिर एक खुद तैयार होने लगी। उसने खूबसूरत आसमानी रंग की साड़ी पहनी थी। साड़ी के साथ ही मैचिंग झुमके भी पहने थे। चेहरे पे हल्का मेकअप और अपने लंबे बालों की अच्छी सी हेयर स्टाइल बनाई थी। इतने में ही दरवाजे की घंटी बजी। मीना ने बड़े ही उत्साह से दरवाजा खोला। उसे लगा के आनंद उसे देखते ही खुश हो जाएगा। पर उसकी सोच से विपरीत आनंद ने उसे घूरते हुए कहा।
” इतना तैयार क्यों हुई हो ? कहीं जा रही हो ?”
” अरे आप भूल गए क्या ? आज अनिल भाईसाहब के घर उनके सालगिरह की पार्टी में जाना है ना। भाईसाहब खुद निमंत्रण देकर गए थे आपको।” मीना ने कहा।
” हा, मुझे पता है। और मै जाऊंगा भी। पर अकेला। तुम बिना मतलब के ही तैयार हुई हो। विवान भी वहां बोर ही होने वाला है। इससे अच्छा है के तुम घर पर ही रुको। मै जाकर आ जाऊंगा।” आनंद ने बड़े ही ठंडे स्वर में कहा।
” पर उस दिन अनिल भैया कह रहे थे के सभी ने आना है। और आपने हा भी कहा था। ” मीना ने कहा।
” हा, मैंने ऐसा ही कहा था। पर मै उसे कोई बहाना बताऊंगा के तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा था इसीलिए तुम नहीं आई।” आनंद ने कहा।
“लेकिन मैं तैयार हो चुकी हूँ और विवान भी बहुत दिनों से कहीं बाहर नहीं गया… थोड़ा बाहर जाकर उसे भी अच्छा लगेगा…” मीना ने कहा।
” क्या तैयार हुई हो? ये पुराने जमाने वाली साड़ी, बालो की चोटी, इसे भी कोई तैयार होना कहते है क्या। पार्टी के लिए कोई ऐसा तैयार होता है क्या ? कभी खुद को आईने मै देखो के क्या हो गई हो तुम। वजन कितना बढ़ा लिया है। बस फूलती ही जा रही हो। तुम्हे कहीं साथ लेकर चलने में मुझे शर्मिंदगी होती है।” आनंद ने कहा।
इतना कहकर आनंद फ्रेश होने चला गया। उसे जरा भी अहसास नहीं था के उसकी बातो से किना के दिल को कितनी चोट पहुंची थी। आनंद उसके बारे में ऐसे सोचता है ये उस आज पता चला था। उसका दिमाग मानो सुन्न हो गया था। वो काफी डर तक सोफे पर किसी बुत की तरह बैठी रही। आनंद अपनी तैयारी करके खुद पार्टी में चला भी गया।
जाते वक्त उसने मीना की तरफ ध्यान देना भी जरूरी नहीं समझा। उसे जरा भी अहसास नहीं था के उसकी बातो से मीना का कितना दिल दुखा है।
आनंद के घर से जाने के काफी देर बाद मीना सोफे से उठी और किचन में जाकर विवान के लिए खाना बनाया। खाना खाकर जीवन सो भी गया। पर मीना को बिल्कुल भी कहने की इच्छा नहीं थी। उसका दिमाग तो मानो काम ही नहीं कर रहा था।
उसे पुराने दिन याद आ रहे थे। शादी की पहली रात जब उसने आनंद से पूछा था कि उन्हें उसमें क्या पसंद आया, तब आनंद ने बड़े ही प्यार से कहा था कि “मुझे तुम्हारी ये सादगी बहुत पसंद है।” और तबसे लेकर अबतक वो कोशिश करती के आनंद की पसंद के अनुसार तैयार हुआ करे। उसकी पसंद का ध्यान रखते हुए उसने खुद को कभी भी बदलने की कोशिश नहीं की।
लेकिन आज उसी आनंद की पसंद बदल गई थी। आज तक जिस पत्नी की सादगी उसे पसंद आती आज वही उसको गवार जैसी लग रही थी। इतनी के अब मीना को अपने साथ कहीं ले जाने में भी उसे शर्म महसूस होती थी।
मीना को पुराने दिन याद आने लगे। विवान के जन्म के बाद उसे अपनी ओर ध्यान देने का समय ही नहीं मिल पाया था। पहले आनंद और फिर विवान, ये दोनों ही उसकी पूरी दुनिया थे। इन दोनों के लिए जीते हुए मीना कब अपना वजूद भूल गई उसे खुद भी नहीं पता चला। रही बात बढ़ते वज़न की। तो उसने सोचा के डिलिवरी के बाद तो वजन बढ़ता ही है। विवान थोड़ा बड़ा होगा तो वजन कम करने का सोचेगी।
लेकिन अब मीना को अपनी गलती का एहसास हो गया था। उसने हमेशा आनंद की पसंद पर ध्यान दिया और उसी के अनुसार खुद को ढाला । लेकिन आनंद को तो इस बात का जरा भी अहसास नहीं था।
उसने अब तय किया था कि अब से उसे आनंद और विवान के साथ-साथ खुद की भी देखभाल करनी है। खुद की पसंद-नापसंद के बारे में भी सोचना है। खुद को समय देना है। और अगले ही दिन से उसने अपना रूटीन बदल दिया।
उसने अपने घर के कामों में मदद करने के लिए एक कामवाली बाई को रखा। और अपने बचे हुए समय में उसने विवान और खुद की ओर ध्यान देना शुरू कर दिया। उसने घर पर ही योगा करना शुरू कर दिया। अब वो सुबह शाम वॉकिंग के लिए बाहर जाने लगी। खाली समय में वो अपनी पसंदीदा किताबे भी पढ़ती।
मीना को शादी से पहले डांस करना बहुत पसंद था लेकिन शादी के बाद कभी डांस के लिए समय ही नहीं मिला। पर अब उसने डांस करना फिर से शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे मीना में बदलाव आना शुरू हो गया था। उसका आत्मविश्वास धीरे-धीरे बढ़ने लगा था।
नियमित व्यायाम और संतुलित आहार के कारण उसे अपना बढ़ा हुआ वजन कम करने में मदद मिली। और उसके आत्मविश्वास से उसके चेहरे पर एक अलग चमक आ गई थी। अब उसने अपने रहन-सहन में भी थोड़ा बदलाव किया था। कम बात करनेवाली मीना अब धीरे-धीरे खुलने लगी थी। पुरानी सहेलियों से फोन पर बात करने लगी थी। नई दोस्तो के साथ भी घुल मिल रही थी।
उसमे आ रहे बदलाव धीरे धीरे आनंद की नजरो में भी आ रहे थे। लेकिन वो इस बात से अनजान था के ये सारे बदलाव उसकी कड़वी बातो के कारण ही मीना में आ रहे थे। लेकिन मीना में हो रहे ये बदलाव उसे अच्छे लग रहे थे। आजकल वो ऑफिस से जल्दी घर आ जाता। मीना से अपने दिनभर की बाते भी साझा करने लगा था।
एक दिन आनंद जब शाम को ऑफिस से जल्दी घर आया तो वो मीना को देखकर हैरान रह गया। गुलाबी रंग के वन पीस में वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। उसके खुले लंबे बाल उसकी सुंदरता को और भी निखार रहे थे। आज मीना ने बहुत ही सुंदर मेकअप भी किया था। आंनद को नजर आज मीना से हट ही नहीं रही थी। उसे इस तरह से तैयार हुआ देखकर आनंद ने कहा।
” कहीं बाहर जा रही हो ?”
” हा, अपनी एक दोस्त के घर जा रही हु। उसका जन्मदिन है आज। उसी खुशी में छोटिसी पार्टी रखी है उसके घर पर। दो – तीन घंटे में जाकर वापस आ जाऊंगी। विवान को भी अपने साथ ले जा रही हु। आपका खाना बना दिया है। गरम करके खा लीजिएगा।” मीना ने जवाब दिया।
” थोड़ा रुको, मै भी तुम्हारे साथ आता हूं। अकेली कैसे जा पाओगी इतनी दूर ?” आनंद ने कहा।
” यही बगल वाली सोसायटी में ही है उसका घर। हम ठीक से चले जाएंगे। आप अभी आए है। थके हुए है। थोड़ा आराम कर लीजिए ।मै जाकर आ जाऊंगी।” मीना ने कहा।
” लेकिन मै कह रहा हूं ना के मै साथ चलता हूं।” आनंद ने हार ऊंचे स्वर में कहा।
” आपको शायद याद नहीं होगा। पर कुछ महीनों पहले मैंने भी आपको कहा था के मै भी आपके साथ बाहर चलती हु। तो आपने क्या कहा था याद है ?” मीना ने पूछा।
आनंद को कुछ याद नहीं आ रहा था। फिर मीना ने आगे कहा।
” आपने कहा था के एक बार खुदको आईने में देखो। तुम कहीं ले जाने लायक नहीं हो। एक नंबर की गवार दिखती हो। मोटी हो गई हो। तुम्हे साथ ले जाने में मुझे शर्म आती है “
ये सबके आनंद सकपका गया। वो कुछ बोल नहीं पाया। फिर मीना ने आगे कहा।
” आज मै तुम्हे कहती हु। तुम भी आज एक बार खुद को आईने मै देखो। सिर पर सिर्फ उतने ही बाल बचे है के उनको गिन भी सकते है अब। पर भी कितना निकल आया है। तो मुझे भी अपने दोस्तो के बीच में तुम्हे अपने साथ ले जाने में शर्म आनी चाहिए ना ?”
अब जाकर कहीं आनंद को अपने कहे शब्द याद आए। उसे याद आया के किस तरह से उसने मीना को अपने कड़वे शब्दों से छलनी किया था। उसे मीना को अपने साथ कहीं बाहर ले जाना भी अच्छा नहीं लगता था उस वक्त। लेकिन आज एक उन सब बातो के लिए बाहर शर्मिंदा हो गया था। उसे अपनी बात पे पछतावा हो रहा था।
उसकी पत्नी ने न जाने कितने कॉम्प्लिकेशन्स के बाद विवान को जन्म दिया था। बच्चे के साथ साथ उसने उसके घर का भी कितने अच्छे से खयाल रखा था। इन सबके बीच उसने अपने आप पर ध्यान दिया ही नहीं था। पर इन सब बातो को नजरअंदाज कर उसने सिर्फ मीना का बढ़ा वजन देखकर उसे न जाने कितना कुछ सुना दिया था। लेकिन मीना के मन में उसके लिए कितना प्यार और समर्पण है ये वो देख ही नहीं पाया। वह कितना स्वार्थी हो गया था, यह उसे समझ में आया। वो मीना से बोला…
“मुझे माफ कर दो मीना। मैं सच में गलत था। मैंने तुम्हें जो भी कहा मुझे नहीं कहना चाहिए था। मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है। और तुम सहिंकह रही हो। मुझे कोई हक़ नहीं बनता के मै तुम्हारे साथ आऊ। तुम जाकर आओ। मै घर पर ही रुक जाऊंगा।” आनंद ने कहा।
“आपको अपनी गलती का एहसास हुआ, यही मेरे लिए काफ़ी है। अब जल्दी फ्रेश होकर आइए। फिर आपको तैयार भी होना है। मैंने आपके कपड़े प्रेस करके बेड पर रख दिए है। हमे आधे घंटे में निकलना भी है। आप जल्दी से तैयार हो जाइए।” मीना ने कहा।
” पर तुम तो अभी जो कह रही थी वो क्या था ?” आनंद ने मीना से पूछा।
” मैंने सोचा के आपको आपकी गलती का अहसास करा दू। आपके जीवनसाथी को आपको कहीं ले जाने में शर्म महसूस हो तो कैसा लगता है। और तुम जैसे भी हो मेरे लिए दुनिया के सबसे खूबसूरत पुरुष हो। और तुम्हारे सर के सारे बाल भी झड़ जाए और तुम्हारे दात भी ना रहे तब भी मेरा प्यार तुम्हारे लिए कभी काम नहीं होगा।” मीना ने मुस्कुराते हुए कहा।
मीना के ऐसा कहते ही आनंद ने मीना को अपने गले से लगा लिया। और उस प्रेम भरे आलिंगन ने उनके रिश्ते में आई कड़वाहट को मिठास में बदल दिया।
समाप्त।
©®आरती खरबड़कर.

