हिंदी कथा – फर्क

हिंदी कथा – फर्क

सुमित ऑफिस के लिए निकल ही रहा था कि उसकी माँ ने उसे आवाज़ लगाई और कहा।

” सुमित बेटा…सुशांत की शादी में अब बस 10-12 दिन बचे हैं…और तुमने अभी तक ऑफिस से छुट्टी नहीं ली?”

“माँ, अभी तो काफी समय है…शादी से चार-पाँच दिन पहले छुट्टी ले लूंगा…वैसे भी शादी की तैयारीया तो काफी हद तक हो चुकी है…तुम और मीना मिलकर सारी तैयारिया कर ही रही हो और पापा भी हर चीज़ में ध्यान दे रहे है।” सुमित ने कहा।

“हो जाएगा बेटा…लेकिन मैं किसी चीज़ में कोई कमी नहीं रखना चाहती…सब कुछ परफेक्ट होना चाहिए…इसलिए तुम भी जल्दी छुट्टी ले लो…” माँ ने कहा।

सुमित ने सिर हिलाकर हाँ में जवाब दिया और ऑफिस के लिए निकल पड़ा। तभी मीना ने जल्दबाजी में उसे आवाज लगाई और कहा दौड़ती हुई उसकी टिफिन बैग लेकर आई। उसे देखकर सुमित बोला,

“धीरे चला करो जरा…दिन-रात काम कर रही हो…थोड़ा आराम भी कर लिया करो…नहीं तो बेवजह बीमार पड़ जाओगी…”

” आराम तो होता रहेगा, पर हमारे सुशांत भैया की शादी है तो इतना तो करना ही पड़ेगा। शादी में सबकुछ बढ़िया ही होना चाहिए।” मीना हंसते हुए बोली।

सुमित ने टिफिन लिया और ऑफिस के लिए निकल पड़ा। लेकिन उसका मन अभी विचलित हो रखा था। सुशांत की शादी को लेकर सब कितने उत्साहित थे। हर एक फंक्शन के लिए कितनी तैयारिया की जा रही थी। उसे वो दिन याद आए जब उसने घर में अपने और मीना के बारे में बताया था। तब घर के सभी लोगों ने इन दोनों की शादी के लिए कितना विरोध किया था।

कई दिन तक घर वालों को मनाने की कोशिश की थी पर कोई फायदा नहीं हुआ था। आखिर सुमित ने घर वालों को दो टूक कहा कि अगर हमारी शादी के लिए नहीं माने तो हम कोर्ट जाकर शादी कर आएंगे। मजबूरन घर वालों ने दोनों की सादगी से शादी कर दी थी। मीना घर की बहू तो बन गई, लेकिन उसे कभी भी घर वालों ने दिल से स्वीकार नहीं किया।

मीना दिन-रात घर का काम करती। मीना के आने के बाद से उसकी सासु मां ने घर की पुरानी कामवाली को हमेशा के लिए छुट्टी दे दी थी। मीना खुशी-खुशी सभी के काम करती। दिनभर सासु के पीछे-पीछे मम्मी मम्मी कहकर कितनी ही बाते करती। लेकिन सासु मां कभी भी उससे खुश नहीं हुईं। फिर भी आज तक मीना ने सुमित से इस बारे में कभी कोई शिकायत नहीं की।

उसने कई बार सुना था जब उसकी मां मीना को कहती की उसके घरवालों ने अच्छा लड़का देखकर उसे फंसा लिया और तुम हमारे गले पड़ गई। सुमित को अक्सर मां की बातों पे गुस्सा आता। पर मीना उसे शांत रहने को कहती। मीना के लिए यही बहुत बड़ी बात थी के उसकी और सुमित की अब शादी हो चुकी है और वो दोनों अब साथ है। यही बात काफी थी मीना को खुश रहने के लिए।।

सुमित को याद आ रहा था के कैसे उसकी मां मेहमानों के सामने मीना का अपमान करती रहती।
वो कहती, “इसने मेरे बेटे को प्यार में फंसाया और इस घर की बहू बन गई,” और ये बात अब मां के लिए बहुत आम हो गई थी। लेकिन जब सुशांत ने अपने और रिया के प्यार के बारे में घर पर बताया, तो उनकी शादी का किसी ने विरोध नहीं किया।

बल्कि मम्मी पापा खुद रिया के घर गए थे शादी की बात करने। सुशांत की शादी उसकी पसंद की लड़की से होने वाली थी, ये सुनकर सुमित को खुशी तो हुई, लेकिन मम्मी पापा के बर्ताव में अंतर देखकर उसे आश्चर्य भी हुआ। मम्मी पापा प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं थे, तो फिर उन्होंने अभी तक मीना को दिल से स्वीकार क्यों नहीं किया, यह सवाल उसे बार-बार परेशान कर रहा था।

पर उसने किसी से कुछ कहा नहीं। शादी से पाँच-छह दिन पहले उसने ऑफिस से छुट्टी ली। घर में शादी की जोरदार तैयारीया चल रही थी। मीना तो सुबह से शाम तक मेहनत कर रही थी। सास की के अनुसार सब कुछ करती थी। शादी के सभी फंक्शन बड़े धूमधाम से हुए। शादी भी भव्य तरीके से संपन्न हुई।

रिया छोटी बहू के रूप में घर आई। ससुराल में उसका भव्य स्वागत हुआ। गृहप्रवेश के बाद रिया ने घर के सभी बड़े के पास जाकर उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। जब वह आशीर्वाद के लिए मीना के पास जा ही रही थी, तभी सासू मां बोलीं,

“उसके पैर छूने की कोई जरूरत नहीं है…”

ये सुनकर सभी रिश्तेदार मीना की तरफ देखकर ताने मारने लगे। मीना वहीं एक जगह बुत सी खड़ी थी। अपनी देवरानी के सामने सासू मां ने उसे जो कहा उससे आज मीना आहट हुई थी। सुमित को भी अब सहन नहीं हुआ तो उसने माँ से कहा,

” क्यों मां… मीना का आशीर्वाद क्यों नहीं लेना है उसे…?”

सुमित सबके सामने ऐसा कुछ बोलेगा, यह उसकी मां ने कभी सोचा नहीं था। मीना ने सुमित को देखकर आंखों जी आंखों में उसे कुछ न बोलने की विनती की। उसकी तरफ देखकर सुमित ने आगे मां से कुछ नहीं बोला। लेकिन जब सारी रस्में पूरी हुई तो वह माँ के कमरे में गया और उसने कहा..

“माँ… मीना ने इस घर के लिए क्या नहीं किया…दिन-रात बिना थके काम करती है…तुम्हारा एक भी शब्द अनसुना नहीं करती…कभी कोई शिकायत नहीं करती…शादी की सारी तैयारियां उसने कीं…फिर भी तुम हमेशा सबके सामने उसे बेइज्जत क्यों करती हो मां ??”

” अच्छे से सिखाकर भेजा है मीना ने तुझे…अब तू उसके लिए मुझसे सवाल जवाब करेगा ?” मां ने कहा।

” वो मुझे कुछ क्यों सिखाएगी भला। वो तो बिचारी खुद कुछ नहीं बोलती, ना ही आजतक कभी मुझसे कोई शिकायत की है है उसने। पर मै खुद देख सकता हु के तुम उसके साथ कैसा व्यवहार करती हो। वो तो मीना खुद मुझे टोकती है के कई तुम्हे कुछ न कहूँ। पर अब की बात अलग है। तुम रिया के सामने मीना से ऐसे व्यवहार करोगी तो वो भी मीना का सम्मान नहीं करेगी।” सुमित बोला।

“और कितना सम्मान चाहिए उसे ? उसे बहु बनाकर लाए है ये काफी नहीं है क्या ?” मां बोली।

“पर तुमने उसे कभी इस घर की बहू के रूप में मन से स्वीकार नहीं किया…आज मैं इसका कारण जानना चाहता हूं। तुम कहती थीं कि तुम्हें प्रेम विवाह स्वीकार नहीं। और मैं अब तक सोच रहा था कि हमने प्रेम विवाह किया इसलिए तुम उसे स्वीकार नहीं कर पाईं। पर सुशांत ने भी प्रेम विवाह किया है ना। तुमने तो उसका विरोध नहीं किया, खुले मन से स्वीकार किया। खुद जाकर रिया का हाथ सुशांत के लिए मांगकर लाई तुम। तो फिर आज तक मीना को क्यों स्वीकार नहीं किया?”सुमित ने आखिर में माँ से पूछा।

“मीना और रिया की बराबरी हो ही नहीं सकती…जहाँ रिया अमीर घर की इकलौती बेटी है…वहीं मीना गरीब घर की चार बहनों में से एक है…उसके पिता के माली हालात इतने खराब थे कि वो अपनी बेटी की शादी धूमधाम से नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने तुम्हें फंसाया। तुम तो ऐसी जगह शादी करके फंस गए। पर सुशांत ने हमारे बराबर के परिवार की बेटी से प्यार किया। इसीलिए इन दोनों में कोई तुलना नहीं हो सकती।”

माँ की बात सुनकर सुमित चौंक गया। उसे लगता था कि मां को प्रेम विवाह स्वीकार नहीं है, इसलिए उसने मीना को नहीं अपनाया। लेकिन आज उसे नया पता चला कि माँ की नाराज़गी का असली कारण मीना का गरीब परिवार से होना था। माँ का ऐसा सोचना सुनकर सुमित को गहरा झटका लगा। उसने माँ से कहा,

“तो क्या जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है, वो प्यार ही ना करें माँ? और अच्छा-बुरा कैसे तय होगा? सिर्फ इस बात से कि उसके पिता अमीर नहीं हैं, क्या उसकी सारी अच्छाइयों को नजरअंदाज करना सही है? हमारे पास किसी चीज की कोई कमी नहीं है, ऐसे में उसके मां पापा के माली हालात से हमे क्यों कोई फर्क पड़ना चाहिए मां ?”

“क्योंकि समाज में हमारी प्रतिष्ठा भी मायने रखती है। और बराबरी वाले लोगो के साथ रिश्ते बनाए जाते हैं तो ही उन्हें स्वीकार किया जाता है।” माँ ने कहा।

“और प्रेम और अच्छाई का कोई मोल नहीं होता क्या मां?” सुमित ने पूछा।

“ये सब बातें सिर्फ सुनने में अच्छी लगती हैं। असल जिंदगी में नहीं।” माँ ने कहा।

सुमित ने माँ को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन माँ अपने विचारों पर अडिग थीं। और इससे सुमित जान गया के मां कभी भी मीना को दिल से नहीं अपनाएगी।

उधर रिया के घर आने के बाद तो मीना के लिए स्थिति और ज्यादा बिकट होने लगी थी। सासू मां दिन-रात उसकी तारीफ करती। घर के सारे काम मीना करती और सास मेहमानों के सामने बताती के ये सब तो रिया करती है।

सास के मीना के प्रति ऐसे व्यवहार के कारण अब रिया भी मीना से ठीक से बात नहीं करती। मां का मीना के प्रति रवैया कभी नहीं बदलेगा ये जानकर सुमित ने मीना के साथ अलग रहने का फैसला किया और अपने ऑफिस में ट्रांसफ़र के लिए अर्जी दे दी। कुछ दिनों बाद ही उसका ट्रांसफ़र दूसरे शहर में हो गया।

उसके बाद मीना और सुमित दोनों अलग शहर में जाकर रहने लगे। मीना की अच्छाई को इतने दिनों तक न जानने वाली सासू मां को मीना के दूर जाने से भी कोई फर्क नहीं पड़ा था। उल्टा मीना के जाने के बाद उन्होंने फिर से कामवाली बाई को वापस बुला लिया। मीना छुट्टियों में घर आती, तब भी सास का दिल जीतने की कोशिश करती पर उसका कोई फायदा नहीं होता। आनेवाले समय में शायद सासू मां को मीना की अच्छाई का शायद अहसास हो। पर अभी तो इन सब बातो की संभावना कम हो लग रही थी। पर सुमित अलग रहते हुए अपनी छोटीसी दुनिया में आपकी मीना के साथ बहुत खुश था, क्योंकि वहाँ उसके प्यार को कोई पैसों या अन्य सामाजिक मापदंडों से तौलने वाला नहीं था।

समाप्त।

©®आरती निलेश खरबड़कर.

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *